Monday, 10 September 2018

बंद का दंश

                              बंद का दंश


हमारे देश में समय-समय पर किसी न किसी राजनैतिक पार्टी के बैनर तले राष्ट्रव्यापी बंद के आयोजन होते आए है। इन देशव्यापी बंदो के पीछे के कारण हर बार अलग-अलग हो सकते है लेकिन, हर बार इसके पीछे का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक ही रहा है, राजनैतिक लाभ। राजनैतिक लाभ के स्वार्थ में ये दल देश को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर कितनी हानि पहुंचाते है, इसका आकलन करेंगे तो दंग रह जाएंगे। प्रतिदिन फैक्ट्रियों में होने वाला उत्पादन, शेयर बाजार में शेयरों की खरीदारी और बिकवाली, रियल एस्टेट सेक्टर में प्रतिदिन रखी जा रही एक-एक ईंट, मॉल से लेकर छोटे किराना स्टोर की बिक्री, सरकारी से लेकर निजी क्षेत्र के दफ्तरों में कामकाज समेत टूरिज्म, बैंकिंग और ट्रांसपोर्टेशन (रेल, हवाई सफर, सड़क इत्यादी) ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जो बंद या हड़ताल से सीधे तौर प्रभावित होते हैं। ये नुकसान करोड़ो नहीं, बल्कि हजारों करोड़ो में होता है। सरकार चाहे यूपीए की हो या एनडीए की, जान-माल की हानि तो हर बार बार ही हुई है और हो रही है। भारत बंद की आड़ में सरकारी संम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना, लोगों को हिंसा को शिकार बनाना और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने वाली भीड़ का उद्देश्य राष्ट्रहित में भला कैसे हो सकता है ! यहां मुझे मिथलेश बरिआ जी की ये पंक्तियाँ प्रासांगिक लग रही है कि भीड़ सरकारी बस जलाकर अभी-अभी लौटी है...उनकी मांग थी कि नौकरी सरकारी चाहिएl


(All Rights are reserved for this content)

No comments:

Post a Comment

370 की संपत्ति

जम्मू & कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A का हटना बेशक एक ऐतिहासिक और साहसिक फैसला है लेकिन मेरा मानना ये है कि सारे नियम कानून ठीक, बस ...