Wednesday, 4 April 2018

Rapping / रैपिंग ?

Pic credit- Know Your Meme
Rap, ये शब्द सुनते ही बेशक हमारे मन में यो यो हनी सिंह और बादशाह समेत तमाम वो सारे नाम दौड़ने लगते है जो आज रैप इंडस्ट्री में ट्रेंडिंग है। आज देश का बच्चा-बच्चा रैपिंग से वाकिफ़ है क्योंकि पिछले पांच-छः वर्षो के दौरान रैप ने पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से होते हुए इतनी ज्यादा तरक्की की है कि आज बॉलीवुड की इक्का दुक्का ही कोई ऐसी फ़िल्म आती है जिसमें एक भी रैप ट्रैक ना हो। खैर भारत मे रैप संस्कृति (Rap culture) को समझने से पहले हमें इतना जान लेना आवश्यक है कि रैपिंग, जो कि आज संगीत की एक विधा के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है, की जड़ें अफ्रीका से जुड़ी हुई है जहां घुम्मकड़ कहानीकार आज की रैपिंग शैली में अपने पूर्वजो की गाथाएं लोगो को सुनाया करते थे (जैसे उत्तर भारत मे भाट)। अफ्रीका से एवं पश्चिमी देशों से होते हुए रैप कल्चर दक्षिण एशिया में पहुंचा। पश्चिमी देशो में रैपर्स ने रैप को सामाजिक मुद्दों में एवं खराब सरकारी तंत्र के खिलाफ अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में प्रयोग किया।

             यूं तो भारत मे रैप का आरम्भ 1990 के दशक से माना जात है जब 'बाबा सहगल' और 'अपाचे इंडियन' जैसे भारतीय रैपर्स ने रैप करना शुरू किया । इसमे कोई दो राय नही कि भारत मे रैपिंग को बेहद लोकप्रिय बनाने के पीछे सबसे बड़ा योगदान 'यो यो हनी सिंह' का है लेकिन मेरे ख्याल से, इंडिया में अगर कोई सबसे पहले हिप हॉप रैप लेके आया है तो वो है पंजाबी रैपर 'बोहेमिआ'। देसी हिप हॉप, जिसका मतलब भारतीय उपमहाद्वीप में होने वाली हिप हॉप रैप से है, भी बोहेमिआ की ही पैदावार है। बॉलीवुड में रैप पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से होते हुए आयी है और इस सफर में रैपर्स ने रैप के वास्तविक उद्देश्य को धूमिल कर दिया है।

              रैप के बारे में ज्यादातर लोगों की समझ सिर्फ यहां तक सीमित है कि एक चलते गाने के बीच मे किसी भी रैपर का कुछ भी बड़बड़ाकर चले जाना ही रैप है। इस सोच के पनपने की पीछे की सबसे बड़ी वजह ही मैनस्ट्रीम के वो रैपर्स है जिन्होंने रैप को सिर्फ और सिर्फ पैसा-नशा-प्यार तक सीमित रखा है। इन्ही वजहों से भारत मे रैप हंसी का पात्र बनती हुई दिखाई देती है जबकि अमेरिका में 'एमिनेम' नाम का रैपर एक या दो नही बल्कि 15 बार संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा पुरुस्कार 'ग्रैमी' और 2 बार 'ऑस्कर' जीत चुका है।

              भारत मे रैप की इस खराब हालत के बावजूद अब भी रफ़्तार (Raftaar) और 'नेज़ी' (Naezy), 'डिवाइन (Divine)',  'डिनो जेम्स (Dino James) और कृसना (Krsna) समेत कुछ अंडरग्राउंड रैपर्स है जिन्होंने सचमुच असली रैप की साख को बचाकर रखा हुआ है। खैर तमाम तरह के उपहास,अवहेलनाओं ओर विरोधों के बावजूद रैपिंग भारत मे पैर पसार रही है।

               एक जाने माने रैपर 'Jazzy Z' ने कहा है "Rap is a poetry।" मैं उनके इस कथन से सौ फीसद सहमत हूं क्योंकि जिस तरह एक लेखक अथवा कवि अपने भावो को शब्दों के माध्यम से कविता के रूप में व्यक्त करता है, ठीक उसी प्रकार एक रैपर भी अपने शब्दों को संगीत और लय-ताल में पिरोकर स्वयं को अभिव्यक्त करता है। तो भारत मे रैप के हाल को देखते हुए मुझे लगता है कि रैपर्स, खासकर मैनस्ट्रीम के रैपर्स, को रैपिंग के असली मायनो को समझते हुए वही करना चाहिए जिसके लिए वास्तव में रैप का उदय हुआ था ना कि सिर्फ पैसा-नशा-प्यार के लिए। बाकी रैप कल्चर बढ़ तो रहा ही है लेकिन, बढ़ती गंदगी भी है और सफाई भी, और हम सब जानते है कि दोनो में फर्क है।

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